अमरकोषसम्पद्

         

वर (नपुं) == कुङ्कुमम्

काश्मीरजन्माग्निशिखं वरं वाह्लीकपीतने 
मनुष्यवर्गः 2.6.124.1.3

पर्यायपदानि
 द्वितीयं च तुरीयं च न स्त्रियामथ कुङ्कुमम्॥
 काश्मीरजन्माग्निशिखं वरं वाह्लीकपीतने।
 रक्तसंकोचपिशुनं धीरं लोहितचन्दनम्॥

 कुङ्कुम (नपुं)
 काश्मीरजन्मन् (नपुं)
 अग्निशिख (नपुं)
 वर (नपुं)
 बाह्लीक (नपुं)
 पीतन (नपुं)
 रक्त (नपुं)
 सङ्कोच (नपुं)
 पिशुन (नपुं)
 धीरन् (नपुं)
 लोहितचन्दन (नपुं)
अर्थान्तरम्
 व्यधो वेधे पचा पाके हवो हूतौ वरो वृत्तौ॥
 देवाद्वृते वरः श्रेष्ठे त्रिषु क्लीबं मनाक्प्रिये॥

 वर (पुं) - वेष्टनसम्भक्तिः 3.2.8.2
 वर (पुं) - देवाद्वृतः 3.3.173.2
 वर (नपुं) - मनाक्प्रियः 3.3.173.2
 वर (वि) - श्रेष्ठः 3.3.173.2
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