अमरकोषसम्पद्

         

नाट्यवर्गः 1.7.2

काकली तु कले सूक्ष्मे ध्वनौ तु मधुरास्फुटे
कलो मन्द्रस्तु गम्भीरे तारोऽत्युच्चैस्त्रयस्त्रिषु
नृणामुरसि मध्यस्थो द्वाविंशतिविधो ध्वनिः
स मन्द्रः कण्ठमध्यस्थस्तारः शिरसि गीयते

काकली (स्त्री) = सूक्ष्मध्वनिः. 1.7.2.1.1

कल (पुं) = अव्यक्तमधुरध्वनिः. 1.7.2.2.1

मन्द्र (पुं) = गम्भीरध्वनिः. 1.7.2.2.2

तार (पुं) = अत्युच्चध्वनिः. 1.7.2.2.3

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