अमरकोषसम्पद्

         

नानार्थवर्गः 3.3.2

आकाशे त्रिदिवे नाको लोकस्तु भुवने जने
पद्ये यशसि च श्लोकः शरे खड्गे च सायकः

लोक (पुं) = जनः. 3.3.2.1.1

श्लोक (पुं) = पद्यम्. 3.3.2.2.1

श्लोक (पुं) = कीर्तिः. 3.3.2.2.1

सायक (पुं) = बाणः. 3.3.2.2.2

सायक (पुं) = खड्गः. 3.3.2.2.2

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